यदि मन सधैं स्थिर बसिदिए,समय सधैं अडिग रहिदिएम कही हँराउथे होला,केही डँराउथे होला,तर, कही कतै,पक्कै रँमाउथे होला
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– निश्चल बस्नेत (Dec 2013)
Posted by:
Nischal Basnet
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